इसलिए सरकार ने दो वरिष्ठ अधिकारियों को नजर अंदाज कर बिपिन रावत को बनाया सेना प्रमुख!

नई दिल्ली। न्यूज18 इंडिया को सूत्रों के हवाले से जो खबर मिली हैं उसके मुताबिक सरकार ने लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत के आतंकवाद से जुड़े अनुभव को देखते हुए वरियता दी है। नए सेना प्रमुख बिपिन रावत पूर्वी सेक्टर में चीन के खिलाफ ऑपरेशन में अहम भूमिका निभा चुके हैं। यही नहीं वो पुलवामा में 19 डिवीजन में भी तैनात रह चुके हैं। सरकार का माना है कि कश्मीर में 1986 से चल रही दहशतगर्दी से निपटने के लिए बिपिन रावत सबसे बेहतर सेना प्रमुख होंगे।

सेनाध्यक्ष की नियुक्ति पर कांग्रेस ने उठाए सवाल

लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत को दो वरिष्ठ अधिकारियों को नजर अंदाज कर सेना प्रमुख बनाया गया है, जिसके बाद कांग्रेस ने इस नियुक्ति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कांग्रेस नेता मंत्री मनीष तिवारी ने सवाल उठाते हुए सरकार से पूछा है कि आर्मी चीफ की नियुक्ति में वरिष्ठता का ख्याल क्यों नहीं रखा गया? क्यों लेफ्टिनेंट जनरल प्रवीण बख्शी और लेफ्टिनेंट जनरल मोहम्मद अली हारीज की जगह बिपिन रावत को प्राथमिकता दी गई। पूर्वी सेना के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल प्रवीण बख्शी सेना प्रमुख जनरल दलबीर सिंह के बाद सबसे वरिष्ठ है।

सेना प्रमुख की नियुक्ति पर सरकार ने दी सफाई

नए सेना प्रमुख की नियुक्ति पर उठ रहे सवालों पर सरकार की तरफ से सफाई आई है। संसदीय राज्यमंत्री मुख्तार अब्बास नकवी का कहना है कि नियुक्ति नियमों के तहत की गई है। नकवी का कहना है कि अभी भी कांग्रेस पार्टी इस बात को स्वीकार नहीं कर पा रही है कि वह सत्ता से बाहर हो गई है। जबकि कांग्रेस को सत्ता से बाहर हुए ढाई साल से ज्यादा समय बीत गया है। जो भी नियुक्ति की प्रक्रिया है उसमें उनके सुझाव की जरूरत नहीं है क्योंकि जो भी नियुक्तियां हो रही हैं सब कुछ सिस्टम के तहत हो रही हैं।

सेनाध्यक्ष की नियुक्ति पर बंटा विपक्ष

सेनाध्यक्ष की नियुक्ति के मामले में विपक्ष बंटा हुआ नजर आ रहा है। कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने सवाल उठाते हुए पूछा कि आर्मी चीफ की नियुक्ति में वरिष्ठता का ख्याल क्यों नहीं रखा गया? सीपीआई नेता डी राजा ने भी कांग्रेस के सुर में सुर मिलाए। हालांकि एनसीपी नेता नवाब मलिक का कहना है कि ये सरकार के अधिकार क्षेत्र का मामला है ऐसे में इस पर विवाद नहीं होना चाहिए।

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