क्‍या आजम के चक्‍कर में कटा धर्मेन्‍द्र का पत्‍ता और पटेल को मिली अहम जिम्‍मेदारी?

नई दिल्‍ली। सपा के अंदरखाने एक और चर्चा जोर पकड़ रही है। चर्चा प्रदेश अध्‍यक्ष पद और आजम खान को लेकर है। बेशक प्रदेश अध्‍यक्ष पद पर नरेश उत्‍तम पटेल की ताजपोशी हो चुकी है। लेकिन चर्चा है कि अध्‍यक्ष की कुर्सी को लेकर उठी चिंगारी को दबाने के लिए जल्‍दबाजी में इस नाम पर फैसला लिया गया है। मुस्‍लिम वोट नाराज न हो और आजम खान मौजूदा वक्‍त में कोई नया विवाद न खड़ा कर दें, इसलिए धर्मेन्‍द्र यादव को पीछे छोड़ते हुए पटेल को कुर्सी पर बैठाया गया।

कहा जा रहा है शिवपाल यादव के बाद बदायूं से सांसद धर्मेन्‍द्र यादव का सपा प्रदेश अध्‍यक्ष बनना लगभग तय हो गया था। हालांकि चर्चा अखिलेश यादव की पत्‍नी डिम्‍पल यादव को लेकर भी थी। लेकिन कुछ देर चली चर्चा के बाद धर्मेन्‍द्र यादव के नाम पर मुहर लग गई थी। शुक्रवार देर शाम से ही आजम खान भी प्रदेश अध्‍यक्ष के पद पर काबिज होने के लिए सक्रिय हो गए थे। दावेदारी को मजबूत करने के लिए आनन-फानन में मुस्‍लिम विधायकों और पदाधिकारियों की बैठक भी कर ली थी।

आशंका जताई जा रही थी कि रविवार को राष्‍ट्रीय अधिवेशन के खत्‍म होने के बाद आजम खान अपनी दावेदारी पेश कर सकते हैं। लेकिन अखिलेश यादव को इसकी भनक लग गई। आनन-फानन में उन्‍होंने अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए सांसद धर्मेन्‍द्र यादव के नाम को पीछे छोड़ दिया। और नरेश उत्‍तम पटेल के नाम की घोषणा कर एक ऐसा नाम आगे बढ़ा दिया जो कभी किसी विवाद में नहीं रहा और पार्टी के लिए एक पुराना और जाना-पहचाना नाम था। लेकिन सूत्रों का कहना है कि प्रदेश अध्‍यक्ष की कुर्सी को लेकर आजम खान अभी भी कोई नया विवाद खड़ा कर सकते हैं। अभी मामला थमा नहीं है।

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