तमिलनाडु की CM जयललिता का निधन !!

तमिलनाडु की सीएम जिनकी उमर 68  साल थी उनका निधन हो गया है । उनका निधन चेननई के अपोलो हॉस्पिटल में हुआ । उनको रविवार को ही दिल का दौरा पड़ गया था। लेकिन अभी उनके निधन की आधिकारिक पुष्टि हुई ।

उनके निधन से पूरे देश में विशेषकर उनके समर्थकों में शोक की लहर दौड़ गयी है। जिसके बाद उन्हें ICU में भर्ती कराया गया था । THE QUINT के अनुसार  अपोलो के डॉक्टरों ने लंदन के डॉक्टर रिचर्ड बेले और उनके सहयोगियों से भी बात की है. अस्पताल में सरकार के कई मंत्री और विधायक पहुंच गए हैं. सीएम आवास के बाहर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है ।

आपको बता दें कि तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता को रविवार शाम दिल का दौरा पड़ा है. अस्पताल ने बयान दिया है कि डॉक्टरों की टीम ने उनकी हालत पर नजर रखी हुई है ।

जयललिता उर्फ ‘अम्मा’ को दिल का दौरा पड़ने के बाद गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने मुंबई में मौजूद तमिलनाडु के राज्यपाल सी विद्यासागर राव से बात की थी ।

जानिए क्यों देरी से हुई अम्मा के निधन की घोषणा

तमिलनाडु की मुख्यमंत्री के निधन की घोषणा सोमवार देर रात की गई। इस से पहले सरकार ने संवैधानिक प्रक्रिया पूरी कर ली। तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता को लेकर किसी भी तरह अप्रिय सूचना मिलने से पहले सत्ताधारी पार्टी (एआईएडीएम) के यह सुनिश्चित कर लेना चाहती थी कि उनके जाने से राज्य में जम्मू-कश्मीर जैसी स्थिति पैदा न हो जाए। जम्मू कश्मीर में दिवंगत मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद के निधन पर राष्ट्रपति शासन लागू हो गया था क्योंकि उनकी बेटी मेहबूब मुफ्ती के नाम पर सियासी सहमति नहीं बन पाई थी।

हालांकि तमिलनाडु के सियासी हालात जम्मू-कश्मीर से जुदा हैं और वहां एक ही पार्टी के पास बहुमत है लेकिन एक पार्टी के सी.एम. उम्मीदवार पर सहमति बनाना भी बड़ी चुनौती है। संविधान के अनुसार राज्यपाल हेड आफ स्टेट होता है और राज्य के मुख्यमंत्री के साथ किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में राज्यपाल अपने विशेषाधिकार का प्रयोग कर के सत्ताधारी पार्टी के किसी भी विधायक को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिला सकता है लेकिन यदि मुख्यमंत्री अपने रहते यदि राज्यपाल को किसी उम्मीदवार के नाम की सिफारिश कर दे तो राज्यपाल के लिए उसी सुझाए उम्मीदवार को शपथ दिलवाना जरुरी हो जाता है।

जयललिता को दिल के दौरे के तुरन्त बाद राज्यपाल सी विद्यासागर राव के अपोलो हस्पताल पहुंचने के इसी प्रक्रिया के हिस्से के तौर पर देखा जा रहा है। इस बीच अपोलो में लगातार विधयकों की बैठक भी भविष्य में पैदा होने वाले संवैधानिक संकट के हल के लिए की जा रही हैं।

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