नरेंद्र मोदी को पीछे छोड़ डोनाल्ड ट्रंप बने टाइम के पर्सन ऑफ द ईयर 2016

टाइम मैगजीन के संपादक मंडल ने बुधवार (सात दिसंबर) को अमेरिकी के निर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को टाइम पर्सन ऑफ द ईयर 2016 घोषित किया। टाइम पत्रिका 1927 के बाद से उस व्यक्तित्व को ‘पर्सन ऑफ द ईयर’ चुनती आयी है जिसने साल भर में “अच्छे या बुरे” तौर पर पूरी दुनिया को सबसे ज्यादा प्रभावित किया हो। डोनाल्ड ट्रंप को इस साल का पर्सन ऑफ द ईयर चुने जाने पर मैगजीन ने टिप्पणी की “तो इस साल का फैसला अच्छे के लिए है या बुरे के लिए?” पत्रिका ने लिखा है कि इस साल डोनाल्ड ट्रंप को पर्सन ऑफ द ईयर चुन गया क्योंकि उन्होंने याद दिलाया कि डेमागॉजी (जनभावनाओं का दोहन करने वाली भाषणबाजी) निराशा पर पलती है और कोई भी सच उतना ही शक्तिशाली होता जितना कि उसे बोलने वाली की विश्वसनीयता होती है। पत्रिका के अनुसार ट्रंप को उन छिपे हुए मतदाताओं के गुस्से और डर को मुख्य धारा में लाकर उन्हें शक्ति देने के लिए चुना गया है। डोनाल्ड ट्रंप को बीते हुए कल की राजनीतिक संस्कृति को नष्ट करके आने वाले कल की राजनीतिक संस्कृति गढ़ने के लिए चुना गया है।

प्रतिष्ठित टाइम मैगजीन द्वारा कराए गए ‘पर्सन ऑफ द ईयर 2016’ के ऑनलाइन रीडर्स पोल में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सबसे आगे रहे थे लेकिन “पर्सन ऑफ द ईयर” कौन होगा इसका आखिरी फैसला मैगजीन का संपादक मंडल करता है।  टाइम के “पर्सन ऑफ द ईयर” की दौड़ में अमेरिका के मौजूदा राष्ट्रपति बराक ओबामा, विकीलीक्स के संस्थापक जूलियन असांज, फेसबुक के संस्थापक मार्क जकरबर्ग और अमेरिकी नेता हिलेरी क्लिंटन शामिल थीं।

इस रेस में रूस के राष्‍ट्रपति व्‍लादिमीर पुतिन, अमेरिका की जिम्‍नास्‍ट साइमन बाइल्‍स, उत्‍तर कोरिया के नेता किम जोंग उन और गायिका बेयोंसे नोल्‍स भी शामिल थे। साल 2010 में फेसबुक के सह संस्‍थापक मार्क जकरबर्ग, 2011 में दुनियाभर में हुए प्रदर्शनों में शामिल हुए लोगों को, 2012 में बराक ओबामा, 2013 पोप फ्रांसिस, 2014 में इबोला बीमारी से लड़ने वाले लोग और 2015 में जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल को टाइम “पर्सन ऑफ द ईयर” चुना गया था।

2016 के पर्सन ऑफ द ईयर के लिए चल रहा रीडर्स पोल रविवार (4 दिसंबर) को  समाप्त हुआ था। पोल में भारतीय पीएण मोदी को सर्वाधिक 18 प्रतिशत लोगों ने पर्सन ऑफ इ ईयर चुना था। वहीं बराक ओबामा, डोनाल्‍ड ट्रंप और विकीलीक्‍स के संस्‍थापक जूलियन असांज को सात-सात प्रतिशत वोट मिले। रेस में शामिल हिलेरी क्लिंटन को 4 फीसदी तथा दुनिया की सबसे बड़ी सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग को 2 प्रतिशत वोट हासिल हुए।

मैगजीन के अनुसार भारतीय प्रधानमंत्री ने हाल के दिनों में 500 और 1000 रुपये के नोटों को बंद कर दिया और पेरिस क्‍लाइमेट समझौते पर दस्‍तखत किए हैं। इसके चलते मोदी की लोकप्रियता बढ़ी है। मैगजीन ने बताया, ”ऐसे व्‍यक्ति या व्‍यक्तियों को चुना जाएगा, जिन्‍होंने हमारी जीवन को सही या गलत रूप से प्रभावित किया है और वे उससे जुड़े हुए हैं जो इस साल हमारे लिए अहम था।” पीएम मोदी साल 2014 और 2015 में भी इस रेस में थे। साल 2014 में तो वे दूसरे पायदान पर रहे थे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *