नौकरी छूटी तो बेटों ने कहा- अब तुम किसी काम की नहीं, घर से निकल जाओ, फिर मां ने खडी की मिशाल

नई दिल्ली: ना उम्र का लिहाज किया ना रिश्तो की परवाह और ना ही समाज का ड़र। इलाहाबाद में रहने वाली 63 साल की वीणापाणी को उनके निर्दयी बेटो ने घर से निकाल दिया। लेकिन वीणापाणी ने हिम्मत नहीं हारी और आज वो शान से इलाहाबाद की सड़कों पर ई-रिक्शा चलाती हैं। वीणापाणी 60 साल की उम्र तक एक निजी कंपनी के अलावा जनसंख्या विभाग से जुड़कर काम किया लेकिन 60 की उम्र पार होने के बाद जब वो रिटायर हुईं तो बेटों ने रिश्ता तोड़ लिया।

नहीं दे सके दो वक्त की रोटी

वीणापाणी की कहानी सुनकर आपकी आंखे छलक उठेंगी। उनके तीन बेटे हैं। लेकिन कोई भी अपनी मां को दो वक्त की रोटी देने को तैयार नहीं है। कुछ साल पहले उनके पति की मौत हो गई थी। जिसके बाद तीनों बेटे वीणापाणी के बुढापे का सहारा थे लेकिन नौकरी छूटी तो बेटो ने घर से निकाल दिया।

लेना पडा कर्ज

जब बेटो ने घर से निकाल दिया तो वीणापाणी ने रिटायरमेंट के बाद मिले पैसों के अलावा कुछ कर्ज लेकर 1 लाख 45 हजार रूपए जुटाए और ई-रिक्शा खरीदा। शुरू में उन्होंने रिक्शा चलवाने के लिए ड्राइवर भी रखे लेकिन जब ड्राइवर काम छोड़ कर भागने लगे तो वीणापाणी ने खुद रिक्शा चलने का फैसला किया।

वीणापाणी की खास बात ये है की ऐसे दौर में जब बेरोजगारी से तंग आकर तमाम नौजवान खुदकुशी कर रहे हैं 63 साल की ये महिला कहती है ‘जीवन एक संघर्ष है संघर्ष करना सीखो।

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