प्रधानमंत्री मोदी ने 3600 करोड़ लागत से बनने वाले शिवाजी स्मारक का शिलान्यास किया

मुंबई:- प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को मुबई में शिवाजी महाराज के भव्य स्मारक का शिलान्यास किया। अरब सागर में बनने वाले 192 मीटर लंबे इस स्मारक की लागत क़रीब 3,600 करोड़ रुपये आंकी गई है। भव्य स्मारक के लिए यह कार्यक्रम नगर निकाय चुनावों के कुछ महीने पहले ऐसे समय आयोजित हुआ, जब 17वीं सदी के महान शासक की विरासत पर दावा करने के लिए राजनीतिक दलों के बीच संघर्ष जारी है।

पीएम मोदी दक्षिणी मुंबई में गिरगाम चौपाटी बीच से होवरक्राफ्ट से स्मारक स्थल तक गए जो तट से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर है। उनके साथ राज्यपाल विद्यासागर राव, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे भी थे।

प्रधानमंत्री ने अरब सागर में भव्य स्मारक के निर्माण की सांकेतिक शुरुआत करते हुए विशिष्ट स्थल पर जलपूजन किया। राज्य सरकार के अनुसार यह स्मारक दुनिया में अपनी तरह का ऐसा सबसे ऊंचा ढांचा होगा। होवरक्राफ्ट पर शिवाजी के वंशज उदयनराजे भोसले और संभाजी राजे भी थे, ये दोनों सांसद हैं।

कार्यक्रम के पहले, फडणवीस ने पीएम मोदी को एक कलश सौंपा, जिसमें महाराष्ट्र के सभी जिलों से एकत्र की गई मिट्टी और नदियों का जल था। होवरक्राफ्ट जब स्मारक स्थल पर पहुंचा तो प्रधानमंत्री ने सागर में कलश को विसर्जित किया।

हालांकि हज़ारों करोड़ की लागत से बनने वाले इस स्मारक का मुंबई का मछुआरा वर्ग विरोध कर रहा है, इन लोगों का कहना है कि इससे पर्यावरण पर बुरा असर पड़ेगा। साथ ही उनलोगों की जीविका पर भी असर पड़ेगा।

साढ़े तीन हजार करोड़ रुपये की लागत से बनने जा रहे छत्रपति शिवाजी मेमोरियल का विवाद ख़त्म नहीं हो रहा है। मुंबई के नरीमन पॉइंट इलाके से आगे अरब सागर में 3 किलोमीटर अंदर बनने वाले इस निर्माण पर मछुआरों ने आपत्ति जताई है।

मछुआरों के नेता दामोदर तांडेल ने कहा है कि शिवस्मारक के निर्माण से मछुआरे मछली पकड़ने पानी में नहीं जा सकेंगे।

पर्यावरणविद प्रदीप पाताड़े का कहना है कि, समुद्र में होने जा रहे इस निर्माण से मुंबई की गिरगाव चौपाटी खत्म हो सकती है, साथ ही, इससे समुद्री पर्यावरण को गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।

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