यूपी: नोटबंदी के 25 दिन बाद भी बैंकों में कैश की किल्लत, गुस्साए ग्रामीणों ने लगाया जाम

लखनऊ: नोटबंदी के चलते इन दिनों देशभर में लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. कुछ ऐसे ही हालात यूपी के भी हैं. जहां 500 और 1000 रुपए के नोट बंद होने बाद से लोगों को बैंकों और एटीएम के बाहर घंटों लाइन लगाना पड़ रहा है. खासकर ग्रामीण इलाकों में कई-कई दिन तक बैंकों में कैश नहीं होने से लोग काफी परेशान है. जिसके चलते लोग कहीं हाइवे जाम कर रहे हैं तो कहीं बैंकों के बाहर प्रदर्शन कर रहे हैं.

इलाहाबाद: 5 दिनों से बैंक से पैसे न मिलने से इलाहाबाद के नाराज़ लोगों ने किया हाइवे जाम

इलाहाबाद में बैंक ऑफ बड़ौदा में पिछले पांच दिनों से पैसे न बंटने से नाराज़ लोगों ने आज जमकर हंगामा करते हुए इलाहाबाद-रीवा नेशनल हाइवे को जाम कर दिया और घंटों किसी को भी बैंक में दाखिल नहीं होने दिया. पुलिस ने करीब डेढ़ घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद जाम को ख़त्म कराया और बैंक में लोगों की आवाजाही शुरू कराई.

लोगों का कहना है कि पांच दिनों से एक भी पैसे नहीं मिलने की वजह से उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. दूसरी तरफ बैंक के कर्मचारियों का कहना है कि हेड आफिस से उनकी ब्रांच को पैसा नहीं भेजा जा रहा है. ब्रांच में भी पैसे ख़त्म हो चुके हैं, इसलिए वह किसी को पैसे नहीं दे पा रहे हैं.

बैंक ने ब्रांच के बाहर लगा रखा है कैश न होने का नोटिस

वैसे यह किल्लत अकेले बैंक आफ बड़ौदा के जारी ब्रांच की ही नहीं है,बल्कि इलाहाबाद के ग्रामीण इलाकों में ज़्यादातर बैंकों का यही हाल है. ग्रामीण इलाकों के बैंकों में नोटबंदी के बाद से पैसे आने और बँटने का कोई वक्त नहीं रह गया है. इलाहाबाद शहर से तकरीबन पचास किलोमीटर दूर मध्य प्रदेश के बॉर्डर के नजदीक स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा की जारी ब्रांच में पिछले पांच दिनों से पैसे नहीं है. बैंक के खुद कैशलेस हो जाने की वजह से लोगों को यहाँ से मायूस होकर वापस लौटना पड़ रहा है. बैंक ने ब्रांच के बाहर पैसे न होने का नोटिस लगा रखा है.

कई दिनों से मायूस होकर वापस लौटने वालों को आज भी पैसे नहीं मिले तो उनका गुस्सा फूट पड़ा. नाराज़ लोगों ने पहले तो बैंक की ब्रांच में हंगामा करते हुए कर्मचारियों के साथ तू तू-मैं मैं की और उसके बाद सड़कों पर उतरकर नेशनल हाइवे को जाम कर दिया. मौके पर पहुँची पुलिस ने करीब डेढ़ घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद लोगों को समझा बुझाकर जाम को ख़त्म कराया.

हरदोई: 3 दिनों से कैश न मिलने से गुस्साए ग्रामीणों ने किया सड़क जाम

यूपी के हरदोई में भारतीय स्टेट बैंक की स्थानीय शाखा में तीन दिनों से नकदी न दिए जाने से आहत ग्रामीणों ने सड़क पर जाम लगा दिया, जबकि आर्यावर्त गामीण बैंक (माझिया) में भी पैसा न होने से परेशान ग्राहकों ने पिहानी गोपामऊ रोड पर जाम लगाकर एक घंटे तक प्रदर्शन किया. जानकारी पाकर पहुंची पुलिस ने लोगों को समझा-बुझाकर जाम खुलवाया. जानकारी के अनुसार, आर्यावर्त ग्रामीण बैंक की पिहानी शाखा पर सुबह से ही खातेदारों की कतारें लगी थीं, जिनमें महिलाएं और पुरुष दोनों शामिल थे. दोनों की लंबी कतारें सड़क तक पहुंच गई थीं, लेकिन बैंक में भुगतान नहीं हो रहा था.

खातेदारों ने बैंक कर्मचारियों से जानकारी की तो उन्होंने कैश आने पर भुगतान करने की बात कही. इस पर खातेदार इंतजार करते रहे, पर जब दोपहर बाद तीन बजे तक कैश बंटना शुरू नहीं हुआ तो खातेदारों का सब्र जवाब दे गया और आक्रोशित होकर खातेदारों ने रास्ते पर जाम लगा दिया. उन्होंने ‘मोदी सरकार हाय हाय’ नारे भी लगाए.

पैसे के लिए सड़क पर ही बैठ गईं कतार में लगीं महिलाएं

पैसे के लिए कतार में लगीं महिलाएं सड़क पर ही बैठ गईं, जिससे यातायात बाधित हो गया. दोनों ओर वाहनों की लंबी लाइन लग गई. ड्यूटी पर तैनात पुलिस कर्मियों ने भीड़ को समझाने का प्रयास किया, पर किसी ने उनकी बात नहीं सुनी और हंगामा शुरू कर दिया. इस पर पुलिस कर्मियों ने उच्चाधिकारियों को सूचना दी.

इसी प्रकार एसबीआई की शाखा में करीब तीन दिनों से कैश न होने के कारण ग्राहकों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा, जिसके बाद शनिवार को जाम लगा दिया गया.

घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और लोगों को भुगतान कराने का आश्वासन देकर जाम खुलवाया. करीब आधे घंटे तक सड़क जाम होने से दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं. अधिकारियों के आश्वासन पर खातेदारों ने जाम हटाया.

सुल्तानपुर: ग्रामीण बैकों से नहीं मिल पा रहे पैसे

नोटबंदी के बाद ग्रामीण बैंक बेकार साबित हो रहे हैं. गरीब ग्रामीणों को लंबी कतारों में खड़े होने के बाद भी पैसा नहीं मिल पा रहा है और इस कारण उनमें आक्रोश बढ़ता जा रहा है. ग्रामीण क्षेत्र में ग्रामीणों का अधिकांश खाता यूपी बड़ौदा ग्रामीण बैंक में खुला है. ग्रामीण खेतीबाड़ी से अर्जित धन को ग्रमीण बैंक में ही जमा करते हैं, लेकिन ग्रामीण बैंक के आगे कई दिनों तक कतार लगाने के बाद भी लोग अपना पैसा नहीं पा रहे हैं.

कतार में खड़े क्षेत्र के एक दलित युवक राम केवल ने बताया कि वह लगातार 12 दिनों से ग्रामीण बैंक की बल्दीराय शाखा पर कतार में खड़ा रहा, लेकिन उसे पैसा नहीं मिल पाया. उसने बताया कि उसकी बेटी का गौना आठ दिसंबर को है, अभी तक पैसे के अभाव में जरूरी सामान की खरीदारी भी नहीं हो पाई है.

युवक ने कहा, “हर सुबह बैंक जाकर लाइन में खड़ा होना पड़ता है और शाम होने पर पता चलता है कि बैंक में पैसे खत्म हो गए हैं. बारह दिनों से यही हाल है.”

शादी-विवाह के अवसरों पर ग्रामीणों को ढाई लाख रुपये तक देने का आदेश

दलित युवक ने बताया कि उसने गौना का कार्ड भी शाखा प्रबंधक को दिखाया, मगर उन्होंने हंसते हुए यह कहकर कार्ड वापस कर दिया कि “मुझे न्यौता मिल गया अब जाओ.” एक तरफ जहां केंद्र सरकार ने शादी-विवाह के अवसरों पर ग्रामीणों को ढाई लाख रुपये तक देने का आदेश बैंकों को दिया है, वहीं ग्रामीण बैंक में चार हजार रुपये तक भी ग्रामीणों को मिलना मुश्किल हो गया है. फिलहाल आगे चलकर ग्रामीणों को भले ही नोटबंदी का लाभ मिले, लेकिन मौजूदा समय में धनाढ्य लोग कम, गरीबों को ज्यादा लाइन में लगना पड़ रहा है.

ग्रामीण बैंक के शाखा प्रबंधक एवं डाकघर के बाबू पांच सौ रुपये के पुराने नोट खाते में जमा करने से इनकार कर रहे हैं. ग्रामीणों को समझ में नहीं आ रहा है कि पुराने नोटों का वे क्या करें. क्षेत्र के किसान मनोज सिंह ने बताया कि वह डाकघर में अपनी आरडी खाते में एक हजार रुपये जमा करने गया, लेकिन बड़े साहब ने पांच सौ रुपये की नोट लेने से इनकार कर दिया. एक छात्रा ने बताया कि उसने ग्रामीण बैंक में पांच सौ रुपये देकर खाता खुलवाना चाहा, लेकिन शाखा प्रबंधक ने नोट लेने से इनकार कर दिया.

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