विदेशों की तर्ज पर पहल, कर्मचारी नहीं, खुद भरना होगा गाड़ी में पेट्रोल.

वो दिन दूर नहीं जब पंप पर पेट्रोल लेने पहुंचने वाला ग्राहक डिस्पेंसर मशीन से खुद ही पेट्रोल भर सकेगा और कार्ड से पेमेंट कर सकेगा। यह सब इतना सरल करने की योजना है कि एक ग्राहक को दो से सवा दो मिनट का वक्त लगे।

इसे लेकर पेट्रोल पंप कंपनियों को पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन  ने पत्र लिखा है और जल्द से जल्द इसे अमल में लाने के लिए भी कहा है। विदेशों की तर्ज पर पेट्रोल पंपों को भी पूरी तरह से कैशलेस करने की प्लानिंग है। योजना है कि हर डिस्पेंसर मशीन पर एक कार्ड स्वाइप मशीन भी लगाई जाए।

उसमें ही पेट्रोलियम प्रोडक्ट की खपत की जानकारी हो। जिससे ग्राहक जितना पेट्रोल चाहिए, वह खुद ही अंकित करे और उसका भुगतान करने के बाद नोजल से पेट्रोलियम पदार्थ ले ले। गौरतलब है कि हर पंप पर चार से आठ तक डिस्पेंसर मशीन होती हैं।

वर्तमान में प्रदेश में 4800 से भी ज्यादा पेट्रोल पंप हैं। इनमें से 3200 से भी ज्यादा पंप पेट्रोल पंप कंपनियों के हैं। साथ ही अन्य निजी पंप हैं। जयपुर शहर में सबसे ज्यादा करीब 275 पेट्रोल पंप है। प्रदेश में हर दिन दो लाख लीटर से भी ज्यादा पेट्रोलियम प्रोडक्ट की खपत होती है।

फायदों के बीच हो सकता है बड़ा नुकसान

पेट्रोल पंपों को विदेशों की तर्ज पर कैशलेस और आसान बनाने की इस योजना में कई फायदे हैं, लेकिन इसका एक बड़ा नुकसान भी है, जो सामने आ सकता है। वर्तमान में प्रदेश में 4800 से भी ज्यादा पेट्रोल पंपों हर पंप पर पांच से सात कर्मचारी काम कर रहे हैं। इन पंपों पर करीब तीस हजार से भी कर्मचारी वर्तमान में कार्यरत है। अगर यह योजना अमल में आती है तो इन कर्मचारियों की नौकरी पर संकट मंडरा सकता है।

विदेशों की तर्ज पर इस योजना पर काम किया जा रहा है। ऐसा हो जाएगा तो पंप पर पहुंचने वाला ग्राहक खुद ही सारे काम कर सकेगा।

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