सादगी की मिसाल, अखिलेश सरकार का एक मंत्री ऐसा जो आज भी रहता है झोपड़ी में, BJP को हराकर बने विधायक

लखनऊ, देश की राजनीति में आज की तारीख में एक नगर निगम पार्षद और ग्राम प्रधान भी अपने लिए आलीशान मकान बना लेते हैं, ऐसे में किसी नेता का जो मंत्री के पद पर होकर भी झोपड़ी में रहता है आश्चर्यजनक लग सकता है। हम बात कर रहे हैं उत्तर-प्रदेश के बहराइच जिले के एक राज्य मंत्री की जो आज भी घासफूस से बने मड़ई में रहते हैं। एमएलए बेमिसाल का खिताब जीत चुके इस मंत्री का नाम है बंशीधर बौद्ध।

बंशीधर बौद्ध बहराइच के बलहा में हुए उपचुनाव में भाजपा कैंडिडेट को हराकर विधायक बने थे। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अक्टूबर में अपनी कैबिनेट का विस्तार करते हुए 21 नए मंत्रियों को कैबिनेट में शामिल किया था। इसमें साफ छवि के बलहा से विधायक बंशीधर बौद्ध भी थे जिन्हें उनकी ईमानदारी से प्रभावित होते हुए सीएम अखिलेश ने अपनी कैबिनेट में जगह दी थी।

सादगी की मिसाल है परिवार

बंशीधर बौद्ध के राज्यमंत्री बनने पर उनकी पत्नी लज्जावती ने अपने पति की सादगी के बारे में बताया, “उ मंत्री भये तो का हुआ? अब हू हल चलईहें और सबसे खुसी-खुसी मिलीहें।”

राज्यमंत्री की पत्नी लज्जावती ने बात करते हुए बताया कि उन्हें विधायक बनने का का भी कभी गुरूर नहीं रहा। भोर होते ही खेतों में हल, बैल लेकर पहुंच जाते थे और माटी की सेवा करते हैं। इसके बाद जनता की सेवा में दिन बिताते हैं। उन्होंने कहा कि माटी और जनता के आर्शीवाद से यह दिन देखने को नसीब हुआ है।

कभी पंचर बनाकर अपने परिवार का गुजारा करने वाले बंशीधर बौद्ध की तरह उनका परिवार भी सादगी से भरा हुआ है। उनकी पत्नी लज्जावती को देख कर कोई भी नहीं कह सकता कि यह एक विधायक या मंत्री की पत्नी हैं।

बंशीधर का आशियाना बहराइच जिला मुख्यालय से करीब 120 किलोमीटर दूर कतर्नियाघाट के जंगल में है। इस इलाके को बिछिया के नाम से जाना जाता है और यह बाघ और तेंदुओं का कोर जोन है। इस इलाके के अंतर्गत जंगल में बसा टेड़िया गांव आधुनिक विकास से कोसों दूर है। इसी गांव में विधायक बंशीधर का चार छप्परों का आशियाना है।

दरवाजे पर बनी एक मड़ई में विधायक जी की चौपाल लगती है, तो अंदर की मड़ई में उनकी तीन बहू और पांच बेटों से भरा उनका पूरा परिवार रहता है। घर का एक हिस्सा घांसफूस से बना टटिया है जिसमें एक टीवी लगी है। टटिया में दूसरी तरफ मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की फोटो भी लगी है। बंशीधर लोकसभा चुनाव के दौरान हुए बलहा विधानसभा के उपचुनाव में समाजवादी पार्टी से विधायक चुने गए थे। वे इससे पहले वो दो बार जिला पंचायत सदस्य रह चुके हैं।

जंगल के बीचो बीच घांसफूस और मिट्टी से बने इस घर में रहने की वजह बताते हुए बंशीधर बताते हैं कि, “इलाके के लोगों ने हमें चुना है, उनकी भावनाएं हमसे जुड़ीं हैं। अगर मैं इन्हें छोड़कर चला गया तो इनकी भावनाओं को ठेस पहुंचेगी।”

बंशीधर के अनुसार, “मैं मूल रूप से मऊ जिले का रहने वाला हूं, उनके पूर्वज यहां जंगल की रखवाली के लिए लाए गए थे, फिर इसी जंगल और यहां रहने वाले लोगों से मन लग गया। अब इन्हें छोड़कर जाने का मन नहीं होता।”

बंशीधर सिर्फ गांव में रहते नहीं हैं बल्कि उनकी दिनचर्या भी गांव के दूसरे लोगों की जैसी है। सुबह 6 बजे उठकर दरवाजे पर झाडू लगाते हैं। लखनऊ में कोई काम और विधानसभा की कार्यवाही नहीं चल रही होती तो दिन में अपने खेतों में काम करते हैं।

एक बड़े छप्पर के नीचे खड़े ट्रैक्टर को दिखाते हुए बंशीधर कहते हैं, “मेरे पास छह एकड़ जमीन है।धान, गन्ना और आलू की खेती करता हूं। बड़े बेटे ज्यादा पढ़-लिख नहीं पाए इसलिए सब मिलकर खेती करते हैं। घर में कोई नौकर नहीं है।

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